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SITA RAM SITA RAM SITA RAM KAHIYE, is bhajan ko sunne se bhakt ke man ko somya aur sakaratmak anubhav hota hai, is bhajan ko sunne matra se bhakt ko Mata Sita aur Shee Ram Chanda ki bhakti ek sath mil jati hai.
रविवार की चुनी हुई प्रेरणादायक कथा एवं ब्लॉग
पौष पुत्रदा एकादशी व्रत संतान सुख, वंश वृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है। शास्त्रों में वर्णित विधि से किया गया यह व्रत जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर देता है।
श्री शङ्कराचार्य कृतं - शिव स्वर्णमाला स्तुति। शिव स्वर्णमाला स्तुति एक दिव्य और दुर्लभ स्तोत्र है जिसमें भगवान शिव के 108 पवित्र नामों का संकीर्तन किया गया है।
शनि देव डर का नहीं, कर्म का देवता हैं। जानिए शनि कौन हैं, शनि कष्ट क्यों देते हैं, शनि साढ़ेसाती का अर्थ और हिंदू शास्त्रों में शनि का वास्तविक उद्देश्य।
चांदी का चौकोर टुकड़ा पास रखना क्यों शुभ माना जाता है? जानिए ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इसके फायदे, चंद्रमा-शुक्र ग्रह को मजबूत करने के उपाय, राहु के दोष से बचाव और मानसिक शांति व समृद्धि से जुड़े रहस्य।
सरस्वती वन्दना (सरस्वती वन्दना) ज्ञान र वाणीकी देवी माता सरस्वतीको ध्यान गर्दा प्रशंसा गर्नुपर्छ। या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।
Panchanguli Mata Jyotish Vidya aur Hastrekha ki devi ke roop me Pooja jata hai, in devi ka tap/sadhna keval anubhavi guru ke margdarshan me karni chahiye.
जया एकादशी पर जो भी भक्त भगवान श्री विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना करता है, उन भक्तों के सभी कष्ट मिट जाते हैं हमारे भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करते हैं।
Shiv Mahimna Stotra
॥ श्री लिङ्गाष्टकम् ॥ ; ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गंनिर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं ; देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहम्करुणाकर लिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गं ; सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गंबुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्।
श्रीराम, रामचन्द्र, रामभद्र, शाश्वत, राजीवलोचन, श्रीमान् राजेन्द्र, रघुपुङ्गव, जानकीवल्लभ....
कामाख्या देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहाँ पर देवी सती का एक अंग गिरा था, जिससे यह स्थान बहुत पवित्र माना जाता है। यहाँ भक्त माता से आशीर्वाद प्राप्त करने और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आते हैं।
श्री पंचमुखहनुमत्कवच स्तोत्र एवं अर्थ-ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:। गायत्री छंद:। पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता। ह्रीं बीजम्। श्रीं शक्ति:। क्रौं कीलकं। क्रूं कवचं। क्रैं अस्त्राय फट्। इति दिग्बन्ध:।
क्या आप जानते हैं कि आपके घर की रक्षा कौन कर रहा है? वह एक राक्षस/दानव है और भगवान शिव से उन्हें वरदान मिला हुआ है। इन्हें सुरक्षा और अच्छे परिवर्तन का शक्तिशाली ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।