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बिंदायक जी की कथा - गणेश जी की कहानी

Ganesh Ji ki Vrat Katha Story
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  • 1 year ago
  • Mamta Sharma
  • 19 Oct 2024

Ganesh ji ki kahani - Vindayak ji ki Vrat Katha - Ganesh ji Maharaj ki Kahani

एक बुढ़िया माई रोज मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी।
बेचारी बुढ़िया के बनाए गणेश जी (Ganesh Ji) रोज गल जाते थे। उसके घर के सामने एक सेठजी का मकान बन रहा था।
बुढ़िया मांई सेठजी के मकान पर जाकर मकान बनाने वाला कारीगर से बोली- ' भाई। मेंरे मिट्टी के बनाए गणेशजी रोज़ गल जाते हैं। आप मेरी पूजा के लिए पत्थर से एक गणेशजी बना दो, आप की बड़ी कृपा होगी।'

'मकान बनाने वाला कारीगर बोला-' 'माई! जितनी देर में तुम्हारे लिए गणेश जी बनाएंगे उतनी देर में तो सेठजी की दिवार पुरी कर देंगे। 'बुढिया यह सुनकर दु:खी मन से अपने घर वापिस आ गई। दिवार पुरी करते- करते शाम हो गई परंतु दिवार बनने से पहले ही टेढ़ी हो जाएं।

शाम को सेठजी आए और पूछा कि आज कुछ काम नहीं किया? तब मकान बनाने वाला कारीगर ने बुढ़िया वाली बात बताई। तब सेठजी ने बुढ़िया मांई से जाकर कहा- ' 'माई! तुम हमारी दिवार सीधी कर दो तो हम तुम्हें सोने के गणेश जी बनवा देंगे।" गणेश जी ने यह सुनते ही सेठ जी की दीवार सीधी कर दी। सेठी जी ने बुढ़िया माई को पूजा के लिए सोने के गणेश जी बनवा कर दिए। गणेश जी को पाकर बुढ़िया माई बहुत प्रसन्न हुई।

हे बिन्दायक जी महाराज! जैसे सेठ जी की दिवार सिधी करी वैसे ही कहते- सुनते हमारे भी सभी कार्य सीधे करना।