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बुद्ध भगवान वन्दना

Buddha Purnima Stotra
  • 128 View
  • 1 year ago
  • Mamta Sharma
  • 31 Jan 2025

वण्ण-गन्ध-गुणोपेतं एतंकुसुमसन्तति ।
पुजयामि मुनिन्दस्य, सिरीपाद सरोरुहे ।१।

पुजेमि बुद्धं कुसुमेन नेनं, पुज्जेन मेत्तेन
लभामि मोक्खं ।
पुप्फं मिलायति यथा इदंमे,
कायो तथा याति विनासभावं।२।

घनसारप्पदित्तेन, दिपेन तमधंसिना ।
तिलोकदीपं सम्बुद्धं पुजयामि तमोनुदं ।३।

सुगन्धिकाय वंदनं, अनन्त गुण गन्धिना।
सुगंधिना, हं गन्धेन, पुजयामि तथागतं ।४।

बुद्धं धम्मं च सघं, सुगततनुभवा धातवो धतुगब्भे।
लंकायं जम्बुदीपे तिदसपुरवरे, नागलोके च थुपे।५।

सब्बे बुद्धस्स बिम्बे,सकलदसदिसे
केसलोमादिधातुं वन्दे।
सब्बेपि बुद्धं दसबलतनुजं बोधिचेत्तियं नमामि।६।

वन्दामि चेतियं सब्बं सब्बट्ठानेसु पतिठ्ठितं।
सारीरिक-धातु महाबोधि, बुद्धरुपं सकलं सदा।७।

त्रिशरण

बुद्धं सरणं गच्छामि । (मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ।)
धम्म सरणं गच्छामि ।(मैं धम्म की शरण में जाता हूँ।)
संघ सरणं गच्छामि ।(मैं संघ की शरण में जाता हूँ।)
दुतियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।(मैं दूसरी बार भी बुद्ध की शरण में जाता हूँ।)
दुतियम्पि धम्म सरणं गच्छामि ।(मैं दूसरी बार भी धम्म की शरण में जाता हूँ।)
दुतियम्पि संघ सरणं गच्छामि ।(मैं दूसरी बार भी संघ की शरण में जाता हूँ।)
ततियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।(मैं तीसरी बार भी बुद्ध की शरण में जाता हूँ।)
ततियम्पि धम्म सरणं गच्छामि ।(मैं तीसरी बार भी धम्म की शरण में जाता हूँ।)
ततियम्पि संघ सरणं गच्छामि ।(मैं तीसरी बार भी संघ की शरण में जाता हूँ।)

महामंगलसुत्तं

बहु देवा मनुस्सा च मंङ्गलानि अच्चिन्तयुं।
आकंङ्खमाना सोत्थानं ब्रुहि मंङगलमुत्तमं॥१॥

असेवना च बालानं पण्डितानञ्च सेवना।
पुजा च पुजनीयानं एतं मंङ्गलमुत्तमं॥२॥

पतिरुपदेसवासो च पुब्बे च कतपुञ्ञता।
अत्तसम्मापणिधि च एतं मंङ्गलमुत्तमं॥३॥

बाहुसच्चं च सिप्पंञ्च विनयो च सुसिक्खितो।
सुभासिता च या वाचा एतं मंङ्गलमुत्तमं॥४॥

माता-पितु उपट्ठानं पुत्तदारस्स सङ्गहो।
अनाकुला च कम्मन्ता एतंमंङ्गलमुत्तमं॥५॥

दानंञ्च धम्मचरिया ञातकानं च सङ्गहो।
अनवज्जानि कम्मानि एतं मंङगलमुत्तमं॥६॥

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