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नवरात्रि पर्व

Navaratri story Knowledge
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  • 3 months ago
  • Mamta Sharma
  • 18 Nov 2025

भारत त्योहारों का देश है, जहाँ हर त्योहार का अपना अलग महत्व है, उसी तरह दुर्गा माता को समर्पित पर्व नवरात्रि चैत्र नवरात्रि 19 से 27 मार्च तक होगी, जबकि शारदीय नवरात्रि 11 से 20 अक्टूबर 2026 तक मनाई जाएगी। माँ दुर्गा को समर्पित इन नौ दिनों में माँ के नौ अलग रूपों की आराधना की जाती है, सभी भगतो को नवरात्रि व्रत का बेसब्री से इन्तजार रहता हैं। भगत जन नवरात्रि के पर्व पर अपने घर और मंदिर को स्वच्छ और सुन्दर तरह से सजाते है। नवरात्रि पर चारो तरफ भक्ति का माहौल बना रहता हैं। पूरा परिवार सुख शांति और सभी पर माता रानी का आशिर्वाद बना रहे इस तरह की मनोकामना से व्रत रखते व पूजन करते है। माता रानी खुश होकर सभी की मनोकामना पूर्ण करती हैं।

शेरों वाली माता को लाल रंग की चुनरी और श्रृंगार आदि चढ़ाया जाता हैं, जो कन्या पूजन के दिन माँ दुर्गा के रूप में पूजी जाने वाली कन्या को भेट स्वरूप दे दी जाती है। शरद नवरात्रों के दिनों में देश के कुछ हिस्सों में माँ दुर्गा की मूर्ति भी पूजी जाती है तथा उत्तर भारत में माँ दुर्गा की सांझी(मूर्ति) बनाने का भी प्रचलन है।

नवरात्रि व्रत 9 दिन के लिए बड़े ही धुम-धाम से मनाया जाता है, जिसमे श्रद्धालु अपने घर में घट स्थापना करते हुए ज्यो (जौ) बोते हैं, पहले ही दिन घी या तेल की अखंड ज्योत प्रज्जवलित की जाती है, जो लगातार 9 दिनों तक प्रज्जवलित रहती है।

नवरात्रि के 9 दिनों तक घर में न तो लहसुन प्याज़ का खाना बनता हैं और न ही तामसिक भोजन ग्रहण किया जाता हैं सिर्फ वैष्णो भोजन ग्रहन करना अति उत्तम बताया गया है। जो व्यक्ति व्रत कर रहा हो इन दिनों जमीन पर ही सोना अच्छा माना जाता हैं। इस समय जगह जगह दुर्गा पंडाल लगाए जाते है जहाँ सभी मिलकर माता रानी की पूजा व आराधना करते हैं।

साल में पड़ती हैं चार बार नवरात्रि

अश्वनी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है सालभर में 4 बार नवरात्रि पड़ती है जिनमें से 2 गुप्त नवरात्रि और 2 प्रत्यक्ष नवरात्रि कहलाती हैं

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना का विधान है अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ पहले दिन कलश स्थापना और व्रत का विधान है. नवमी और दशमी पर कन्या पूजन, कलश और प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है

कब से नवरात्रि व्रत प्रारंभ हो रहे है?

नवरात्रि की शुरुआत(प्रतिपदा)

19 मार्च 2026 - दिन गुरुवार

नवरात्रि का समापन

27 मार्च 2026 - दिन शुक्रवार

पारण

27 मार्च 2026, शुक्रवार को

डोली पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा

देवी पुराण में कहा गया है यदि नवरात्रि रविवार, सोमवार से प्रारंभ हो तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनि, मंगल को घोड़े पर, गुरु एवं शुक्र को डोली में तथा बुध को नाव में सवार होकर आती हैं। इस बार मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आएंगी हर साल मां अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती है. मां का हर वाहन विशेष संदेश देता है। डोली पर सवार होने से पूरी विश्व में यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में लोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पालकी शांति का प्रतीक भी है, और यह एक कोलाहल जैसी प्रवृत्ति भी उत्पन्न करती है, जो एक प्रकार की आर्थिक उथल-पुथल का संकेत है।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

 

घटस्थापना के साथ माँ शैलपुत्री की पूजा से होती है

शुक्ल पक्ष प्रतिपदा प्रांरभ

19 मार्च को सुबह 06 बजकर 23 मिनट

नवरात्रि की डेट

  1. 19 मार्च 2026: पहला दिन मां शैलपुत्री पूजा - घटस्थापना
  2. 20 मार्च 2026: दूसरा दिन-मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  3. 21 मार्च 2026: तीसरा दिन-मां चंद्रघंटा पूजा
  4. 22 मार्च 2026: चौथा दिन -मां कुष्मांडा पूजा
  5. 23 मार्च 2026: पांचवां दिन -मां स्कंदमाता पूजा
  6. 24 मार्च 2026: छठा दिन -माता कात्यायनी पूजा
  7. 25 मार्च 2026: सातवां दिन -मां कालरात्रि पूजा
  8. 26 मार्च 2026: आठवां दिन -दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजा, महानवमी
  9. 27 मार्च 2026: नौवां दिन -महानवमी- नवरात्रि का पारण

नवरात्रि उद्यापन विधि

नवरात्रि उत्सव के अंत में की जाने वाली रस्म है। उद्यापन विधि करने के चरण यहां दिए गए हैं:

  1. नवरात्रि के नौवें दिन कन्या पूजन या कन्या पूजन में भोजन और दक्षिणा (प्रसाद) का भोग लगाएं।
  2. दसवें दिन हवन (अग्नि अनुष्ठान) करें और देवी दुर्गा की पूजा करें।
  3. ब्राह्मणों या पुजारियों को भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें।
  4. पूजा और अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद, देवी को प्रसाद (प्रसाद) अर्पित करें और इसे परिवार के सदस्यों और दोस्तों के बीच वितरित करें।
  5. इस शुभ दिन पर जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करने का महत्व है।
  6. नवरात्रि के दौरान रखे गए व्रत का समापन गेहूं के आटे से बनी मिठाई या सूजी के हलवे का सेवन करके किया जाता है।
  7. देवी की मूर्तियों या तस्वीरों को जल निकाय में विसर्जित किया जाना चाहिए, अधिमानतः नदी या झील में।

ये नवरात्रि उद्यापन विधि के चरण हैं, और इन्हें भक्ति और समर्पण के साथ करने से घर में शांति और समृद्धि आती है।

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