||ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:||
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान शनिवार को व्रत रखने के साथ-साथ शनिवार व्रत कथा का पढ़ना और सुनना विशेष रूप से लाभदायक होता है।
शनि देव भगवान सूर्य और देवी छाया के पुत्र है, शनि देव को कर्मो का देव कहा जाता है अर्थात जैसे कर्म करोगे शनि देव उसका फल अवश्य देंगे।