||ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:||
शनि देव भगवान सूर्य और देवी छाया के पुत्र है, शनि देव को कर्मो का देव कहा जाता है अर्थात जैसे कर्म करोगे शनि देव उसका फल अवश्य देंगे।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
सूर्य देव व्रत कथा-एक बुढ़िया माई थी। उनका एक बहुत ही सरल सा नियम था कि प्रति रविवार को सवेरे ही स्नान आदि कर, पड़ोसन की गाय के गोबर से घर को लीपकर फिर भोजन तैयार कर भगवान को भोग लगा स्वयं भोजन करती थी। ऐसा व्रत करने से उसका घर धन-धान्य एवं आनन्द से पूर्ण था।