ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥...
महालक्ष्मी-धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी का पावन व्रत। यह व्रत राधाष्टमी के दिन ही किया जाता है। यह व्रत 16 दिन तक रखते हैं।
हमारे शास्त्रों में उल्लेख है, अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से दरिद्रता से मुक्ति मिलती है, रोजाना करें अष्टलक्ष्मी स्तोत्र पाठ।
अपार धन-संपदा देने वाला कनकधारा स्त्रोत - अङ्ग हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।