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lingashtakam

॥ श्री लिङ्गाष्टकम् ॥ ; ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गंनिर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं ; देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहम्करुणाकर लिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गं ; सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गंबुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्।

lingashtakam Stotra
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  • 10 months ago
  • Mamta Sharma
  • 16 Jul 2025

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