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माँ भवानी ने कैसे किया रक्तबीज का वध

maa kaali Story
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  • 1 year ago
  • Mamta Sharma
  • 02 Jan 2025
मंत्र

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

देवी दुर्गा ने दैत्यों के संहार के लिए कई अवतार लिए, इन्हीं में से एक दैत्य था रक्तबीज। यह महाशक्तिशाली था। इसकी पौराणिक कथा दुर्गा सप्तशती में बताई गई है। रक्तबीज ने शिवजी को प्रसन्न करके वर प्राप्त किया था। रक्तबीज को वरदान प्राप्त था कि जहां-जहां उसके रक्त की बूंद गिरेंगी, वहां-वहा रक्तबीज की तरह ही शक्तिशाली दैत्य पैदा हो जाएंगे। रक्तबीज बहुत शक्तिशाली था। उसका वध सभी देवता मिलकर भी नहीं कर पा रहे थे।

देवताओं के साथ जब भी युद्ध होता तो जैसे ही किसी देवता के प्रहार से रक्तबीज के शरीर से रक्त बहता तो कई और रक्तबीज उत्पन्न हो जाते थे। इस वजह से देवता उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद देवताओं की प्रार्थना पर देवी दुर्गा ने रक्तबीज के साथ युद्ध किया। माता उस दैत्य के अंगों को काटकर गिराती जाती थीं। जैसे ही उस असुर के रक्त की जितनी बूंद गिरतीं, उतने ही नए दैत्य उत्पन्न हो जाते थे।
तब देवी ने चंडिका को आदेश दिया कि मैं जब इस राक्षस पर प्रहार करूं, तब-तब तुम इसका रक्त पी जाना। इससे नए राक्षस उत्पन्न ही नहीं हो पाएंगे। चंडिका ने देवी की आज्ञा से ऐसा ही किया। चंडिका ने मुंह विकराल कर लिया और कई राक्षसों को निगल लिया। रक्तबीज के रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही पी लिया। इस तरह देवी दुर्गा ने रक्तबीज का संहार कर दिया।