हमारे शास्त्रों में उल्लेख है, अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से दरिद्रता से मुक्ति मिलती है, रोजाना करें अष्टलक्ष्मी स्तोत्र पाठ।
बुभुक्षित: किं करोति पापम्। क्षीणा: नरा: निष्करुणा भवन्ति।।
महालक्ष्मी-धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी का पावन व्रत। यह व्रत राधाष्टमी के दिन ही किया जाता है। यह व्रत 16 दिन तक रखते हैं।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥