Hindi Mode BhagwanApp

श्री वज्रेश्वरी माता कांगड़ा देवी मंदिर

Shaktipeeth Story
  • 1484 View
  • 1 year ago
  • Mamta Sharma
  • 30 Dec 2024

मंत्र

शक्तिपीठ श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर, कांगड़ा

कांगड़ा का ब्रजेश्वरी शक्तिपीठ मां का ऐसा धाम है, जहां मां के दर्शन कर भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं।

श्री वज्रेश्वरी माता मंदिर जिसे कांगड़ा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, एक हिंदू मंदिर है जो भारत के हिमाचल प्रदेश में, शहर कांगड़ा में स्थित दुर्गा का एक रूप वज्रेश्वरी देवी को समर्पित है। माता व्रजेश्वरी देवी मंदिर को नगर कोट की देवी व कांगड़ा देवी के नाम से भी जाना जाता है और इसलिए इस मंदिर को नगर कोट धाम भी कहा जाता है।ब्रजेश्वरी देवी हिमाचल प्रदेश का सर्वाधिक भव्य मंदिर है। मंदिर के सुनहरे कलश के दर्शन दूर से ही होते हैं. प्रसिद्ध नौ देवी यात्रा मे माँ वज्रेश्वरी के दर्शन तीसरे स्थान पर है माँ वैष्णो से शुरू होने वाली यात्रा मे माँ चामुण्डा देवी, वज्रेश्वरी देवी, ज्वालामुखी देवी, चिंतपूर्णी देवी, नैना देवी बिलासपुर, मनसा देवी पंचकुला, कालिका देवी कालका, शाकम्भरी देवी सहारनपुर आदि शामिल हैं इन मंदिरों की गणना शक्तिपीठों मे होती है

ब्रजेश्वरी कांगड़ा देवी मंदिर पौराणिक कथा के अनुसार

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती के पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में उन्हे न बुलाने पर उन्होने अपना और भगवान शिव का अपमान समझा और उसी हवन कुण्ड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिये थे। तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण्ड के चक्कर लगा रहे थे। उसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था और उनके अंग धरती पर जगह-जगह गिरे। जहां उनके शरीर के अंग गिरे वहां एक शक्तिपीठ बन गया। उसमें से सती की बायां वक्षस्थल इस स्थान पर गिरा था जिसे माँ ब्रजेश्वरी या कांगड़ा माई के नाम से पूजा जाता है। इसी प्रकार ज्वाला जी मे जिह्वा गिरने से ज्वाला देवी शक्तिपीठ, नैन गिरने से नैना देवी, चरण गिरने से चिंतपूर्णी, मस्तिष्क का भाग गिरने से मनसा देवी, शीश गिरने से शाकम्भरी देवी, गुल्फ गिरने से भद्रकाली आदि शक्तिपीठों की उत्पत्ति हुई

इतिहास

कहा जाता है कि मूल मंदिर महाभारत के समय पौराणिक पांडवों द्वारा बनाया गया था। किंवदंती कहती है कि एक दिन पांडवों ने देवी दुर्गा को अपने सपने में देखा था जिसमें उन्होंने उन्हें बताया था कि वह नगरकोट गांव में स्थित है और यदि वे खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उन्हें उस क्षेत्र में उनके लिए मंदिर बनाना चाहिए अन्यथा वे नष्ट हो जाएंगे। उसी रात उन्होंने नगरकोट गाँव में उसके लिए एक शानदार मंदिर बनवाया। 1905 में मंदिर को एक शक्तिशाली भूकंप से नष्ट कर दिया गया था और बाद में सरकार द्वारा इसका पुनर्निर्माण किया गया था।

Releated Stories

32 divine names of Maa Durga
माँ दुर्गा के 32 दिव्य नाम

जो भक्त मां दुर्गा के 32 नामों का जाप करता है उसे मां की कृपा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है, भक्त को अपने अंदर एक अलग तरह का आत्मविश्वास महसूस होता है और शक्ति मिलती है।

Shri Gayatri Mata Aarti
जयति जय गायत्री माता आरती

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥