मैं भोला पर्वत का रै तू राणी महला की तेरी मेरी पार पड़ै ना बेशक लिखी पहला की. तू भोला पर्वत का रे मैं रानी महला की तेरी मेरी जोरी खूब जमे या लिखी पहला की किसे राजा तै ब्याह करवाले मेरी गैल म रै पछतावैगी तेरी काया पड़ज्या काली रै
॥ श्री लिङ्गाष्टकम् ॥ ; ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गंनिर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं ; देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहम्करुणाकर लिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गं ; सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गंबुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्।