!!वक्रा-तुन्ददा महा-काया सुराया-कोटि समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देवा सर्व-कारयेषु सर्वदा !! (ओम गं गणपतये नमो नमः शिर शिद्धिविनायक नमो नमः शिर शिद्धिविनायक नमो नमः अष्टविनायक नमो नमः गणपति बप्पा मोरया)
जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥ जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥ जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥ वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥ बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व है, श्री गणेश जी की कृपा पाने के लिए बुधवार के दिन गणेश व्रत भी किया जाता है।
वैशाख चौथ की कहानी - पुराने समय में रंतीदेव नाम का एक राजा था। उनके राज्य में एक ब्राह्मण रहता था जिसका नाम धर्मकेतु था। धर्मकेतु की दो पत्नियां थीं। सुशीला धार्मिक स्वभाव की थीं और उपवास, पूजा-पाठ करती रहती थीं। इसके विपरीत चंचलता भोग-विलास में लीन थी। उनका किसी उपवास या पूजा ....