!!वक्रा-तुन्ददा महा-काया सुराया-कोटि समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देवा सर्व-कारयेषु सर्वदा !! (ओम गं गणपतये नमो नमः शिर शिद्धिविनायक नमो नमः शिर शिद्धिविनायक नमो नमः अष्टविनायक नमो नमः गणपति बप्पा मोरया)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
Om Jai Jagdish Hare Aarti | ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त ज़नो के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिन से मन का, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
वैशाख चौथ की कहानी - पुराने समय में रंतीदेव नाम का एक राजा था। उनके राज्य में एक ब्राह्मण रहता था जिसका नाम धर्मकेतु था। धर्मकेतु की दो पत्नियां थीं। सुशीला धार्मिक स्वभाव की थीं और उपवास, पूजा-पाठ करती रहती थीं। इसके विपरीत चंचलता भोग-विलास में लीन थी। उनका किसी उपवास या पूजा ....
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान गणेश को फूल और चावल चढ़ाकर व्रत का संकल्प लें। हिंदू वर्ष के अंतिम महीने में इस शुभ दिन को मनाने से सच्चे मन से की गई पूजा से विशेष आशीर्वाद और फल की प्राप्ति होती है।