!!वक्रा-तुन्ददा महा-काया सुराया-कोटि समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देवा सर्व-कारयेषु सर्वदा !! (ओम गं गणपतये नमो नमः शिर शिद्धिविनायक नमो नमः शिर शिद्धिविनायक नमो नमः अष्टविनायक नमो नमः गणपति बप्पा मोरया)
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥...
वैशाख चौथ की कहानी - पुराने समय में रंतीदेव नाम का एक राजा था। उनके राज्य में एक ब्राह्मण रहता था जिसका नाम धर्मकेतु था। धर्मकेतु की दो पत्नियां थीं। सुशीला धार्मिक स्वभाव की थीं और उपवास, पूजा-पाठ करती रहती थीं। इसके विपरीत चंचलता भोग-विलास में लीन थी। उनका किसी उपवास या पूजा ....