आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।। अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतन के प्रभु सदा सहाई। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए। लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
किष्किंधाकाण्ड, वाल्मीकि की रामायण और गोस्वामी तुलसीदास की श्रीरामचरितमानस का एक भाग है। इसमें हनुमान जी से भेंट, बालि वध और माता सीता की खोज की तैयारी तक की कथा आती है।
मां सीता के जन्मोत्सव का पावन पर्व, वैशाख मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को पुष्य नक्षत्र में माता सीता का प्राकट्य हुआ था।