English Mode BhagwanApp

वरुथिनी एकादशी व्रत महत्व और कथा

वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा-अर्चना की जाती है। वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से दुर्भाग्य भी पलट सकता है। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को जीवन में समृद्धि, प्रचुरता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

Varuthini Ekadashi Story Story
  • 432 View
  • 2 months ago
  • Mamta Sharma
  • 30 Dec 2025

मंत्र

॥शांताकारं भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम॥

जो व्यक्ति वरुथिनी एकादशी व्रत रखता है और विधि-विधान से पूजा करता है उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। वरुथिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त 2026 में 13 अप्रैल, सोमवार।

वरुथिनी एकादशी का महत्व

  • वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से बुरे भाग्य को भी बदला जा सकता है।
  • इस व्रत को रखने वाले व्यक्ति अपने जीवन में समृद्धि, प्रचुरता और सौभाग्य प्राप्त करता है।
  • इस पावन दिन व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

वरुथिनी एकादशी कथा

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का महत्व बताने को कहा और इस व्रत की कथा भी पूछी। तब भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा सुनाई।

प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मन्धाता नाम का एक राजा राज्य करता था। वे एक तपस्वी और परोपकारी राजा थे। एक दिन वह वन में तपस्या करने गया। वह जंगल में एक स्थान पर तपस्या करने लगा, तभी वहां एक भालू आ गया। वह राजा मान्धाता के पैर चबाने लगा, लेकिन राजा तपस्या में लीन रहा। भालू राजा को घसीटकर जंगल में ले जाने लगा। 
भालू के इस व्यवहार से राजा बहुत डर गया। उन्होंने अपने हृदय में रक्षा के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भक्त की पुकार सुनकर भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए और भालू को मारकर राजा की जान बचाई। भालू ने राजा की टांग खा ली थी, जिससे राजा बहुत दुखी था। तब भगवान विष्णु ने उनसे कहा कि तुम दुखी मत होओ। इसका एक समाधान है। आप मथुरा में वरुथिनी एकादशी का व्रत करें, वहां मेरे वराह अवतार की मूर्ति की पूजा करें। उस व्रत के प्रभाव से आप ठीक हो जाएंगे। तुम्हारे पुराने जन्म के पापों के कारण भालू ने तुम्हारे पैर खा लिए। आप दिए गए उपाय को करें।

प्रभु की बातें सुनकर राजा ने वरूथिनी एकादशी का व्रत मथुरा में किया। वहां पर उसने वराह अवतार मूर्ति की विधि विधान से पूजा की। फलाहार करते हुए व्रत किया। वरूथिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा फिर से सुंदर शरीर वाला हो गया। मृत्यु के बाद उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। इस प्रकार जो कोई भी वरुथिनी एकादशी का व्रत करता है, उसके पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने क्रोधित ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया, तो उन्हें शाप मिला था। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव ने वरुथिनी एकादशी का व्रत किया था। वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान शिव श्राप और पापों से मुक्त हो गए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत करने का फल कई वर्षों की तपस्या के बराबर होता है।

Releated Stories

Kamika Ekadashi vrat katha
कामिका एकादशी व्रत कथा

Kamika Ekadashi vrat katha in Hindi - Narad ji ne Brahma Ji se pucha ki 'Hey Pitamah' mujhe shravan mas ke krishna paksh ki ekadashi ki katha sunne ki ichcha hai, uska kya nam hai? kya vidhi hai or uska mahatmya kya hay? Kripya mujhe batay!

Aamlaki Ekadashi Vrat Katha
आमलकी एकादशी व्रत कथा

इस वर्ष आमलकी एकादशी 21 मार्च 2026, सोमवार को मनाई जा रही है। आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहते हैं। आमलकी एकादशी महाशिवरात्रि और होली के मध्य में आती है।

Jaya Ekadashi Vrat Katha
जया एकादशी व्रत कथा

जया एकादशी पर जो भी भक्त भगवान श्री विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना करता है, उन भक्तों के सभी कष्ट मिट जाते हैं हमारे भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करते हैं।

Jyesht Apara Ekadashi Vrat Katha
ज्येष्ठ अपरा एकादशी व्रत कथा

अचला तथा अपरा दो नामों से जानी जाती है। पुराणों के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी अपरा एकादशी है, क्योंकि यह अपार धन देने वाली है। जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं, वे संसार में प्रसिद्ध हो जाते हैं।