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कीर्तिमुख : एक दानव, जो देवताओं से भी ऊपर है

क्या आप जानते हैं कि आपके घर की रक्षा कौन कर रहा है? वह एक राक्षस/दानव है और भगवान शिव से उन्हें वरदान मिला हुआ है। इन्हें सुरक्षा और अच्छे परिवर्तन का शक्तिशाली ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।

Story of Kirtimukha Story
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  • 1 year ago
  • Mamta Sharma
  • 11 Apr 2025
मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं कीर्ति कौमुदी वागीश्वरी प्रसन्न वरदे कीर्ति मुख मन्दिरे स्वाहा।

Why is kirti mukh asur added to the heads of God sculptures?

इन्द्रियस्येन्द्रियस्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ |
तयोर्न वशमागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपन्थिनौ || 34||

भारतीय मंदिर के गर्भगृह के प्रवेश द्वार के ऊपर मुस्कुराते या घूरते रहस्यमय राक्षस चेहरे के पीछे का रहस्य पढ़ें।

हिंदू पौराणिक कथाओं के दायरे में कदम रखें, और आप खुद को देवी-देवताओं और रहस्यमय प्राणियों की कहानियों से घिरा हुआ पाएंगे। फिर भी, भारतीय मंदिरों की भव्यता और आध्यात्मिकता के बीच, एक जिज्ञासु रहस्य छिपा है: राक्षस चेहरे की उपस्थिति, जो अक्सर गर्भगृह के प्रवेश द्वार के ऊपर घूरती रहती है। इन भयानक दृश्यों के पीछे कौन सी दंत-कथा है? आइए कीर्तिमुख नामक राक्षस के मनोरम रहस्य को जानें, जिसका चेहरा देवताओं से भी ऊंचा दर्जा रखता है।

कीर्तिमुख (महिमा का चेहरा) - कीर्तिमुख कौन है? Swallowing Monster Face

कीर्तिमुख का मतलब है एक यशस्वी चेहरा। कीर्तिमुख एक ऐसा असुर है, जिसको मंदिर में भगवान से भी ऊपर स्थान दिया गया है, इसके नुकिले दातो और फेले हुए जबड़े है। एसा मुख होने के विपरीत इन्हें सुरक्षा और अच्छे परिवर्तन का शक्तिशाली ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार जालंधर ने महादेव को चुनौति देने के लिए राहु को ये आदेश दिया कि वो महादेव के मस्तक पर चन्द्र को ग्रास करे (खा ले)। जैसे ही राहु ने चंद्र को ग्रास करने की कोशिश की, तब महादेव क्रोधित हो गए और उनकी तीसरी आंख से एक भयानक राक्षस उत्पन्न हुआ, इस राक्षस का जन्म राह को खाने के लिए हुआ था।

महादेव ने तब उस राक्षस को राहु को खाने का आदेश दिया। उस राक्षस से भयभीत हो राहु ने महादेव से क्षमा मांगी, इस पर भोलेनाथ ने राहु को क्षमा कर दिया। उसके बाद राक्षस ने पूछा अब मैं क्या खाउ? तब महादेव ने कहा कि तुम खुद को खालो तब उस राक्षस ने अपना शरीर खाना शुरू कर दिया परंतु उसकी भूख खत्म नहीं हुई, तब महादेव ने उसे कहा के अब से तुम लोगो के पाप, लोभ और बुरी नियत सबको खाओगे।

इसलिए आज भी मंदिर के द्वार पर या फिर भगवान के विग्रह के ऊपर कीर्तिमुख मिलता है, यह बात का संकेत देता है कि अगर आपको भगवान से मिलना है तो आपको क्रोध, लोभ और बुरी नियत को छोड़ना होगा।

  • कीर्तिमुख मंत्र है - ॐ ह्रीं श्रीं कीर्ति कौमुदी वागीश्वरी प्रसन्न वरदे कीर्ति मुख मन्दिरे स्वाहा
  • श्रोतागण आकर्षण मंत्र है - ॐ श्रीं ह्रीं कीर्तिमुख मंदिरे स्वाहा
  • कीर्तिमुख एक दानव थे. इनके शिल्प आमतौर पर मंदिरों में भगवद्मूर्ति के ऊपर पाए जाते हैं.
  • कीर्तिमुख पूजन के लिए कुछ मंत्र हैं:
    • शूषाय स्वाहा
    • सध्सर्पाय स्वाहा
    • चन्द्राय स्वाहा
    • ज्योतिषे स्वाहा
    • मलिम्म्लुचाय स्वाहा
    • दिवा पतयते स्वाहा
    • ॐ असवे स्वाहा
    • वसवे स्वाहा
    • विभुवे स्वाहा
    • विवस्वते स्वाहा
    • गणश्रिये स्वाहा
    • गणपतये स्वाहा

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