English Mode BhagwanApp

मकर संक्रांति की कथा

मकर संक्रांति को भारत के साथ नेपाल में भी मनाया जाता है, पौष माह में सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसके साथ ही खरमास भी खत्म हो जाता है, जिसके साथ इस दिन से सनातन धर्म में शुभ कार्य शुरू हो जाते है।

Makar Sankranti festival Story
  • 264 View
  • 1 year ago
  • Mamta Sharma
  • 01 Jan 2025

हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व होता है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के दिन से खरमास खत्म हो जाते हैं और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस दिन सूर्य देव की उपासना करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन शुभ मुहूर्त में गंगा स्नान और दान करने से व्यक्ति के सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।

इस दिन से धरती पर अच्छे दिनों की शुरुआत मानी जाती है इसकी वजह यह है कि सूर्य इस दिन से दक्षिण से उत्तरी गोलार्ध में गमन करने लगते हैं। इससे देवताओं के दिन का आरंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्वर्ग का दरवाजा खुल जाता है। इसलिए इस दिन किया गया दान पुण्य अन्य दिनों में किए गए दान पुण्य से अधिक फलदायी होता है।

मकर संक्रांति के दिन शुभ और महा शुभ मुहूर्त का खास महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शुभ और महा शुभ मुहूर्त में गंगा स्नान और दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है, साथ ही सूर्य देव की कृपा भी प्राप्त होती है।

भीष्म ने चुना था आज का दिन

मकर संक्रांति के दिन शुद्ध घी एवं कंबल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का ही चयन किया था। गीता में बताया गया है कि जो व्यक्ति उत्तरायण में शुक्ल पक्ष में देह का त्याग करता है उसे मुक्ति मिल जाती है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं इसलिए इस पुण्यदायी दिवस को हर्षोल्लास से लोग मनाते हैं।

Releated Stories

Bindayak Ji ki Kahani - Ganesh vrat Katha
बिंदायक जी की कहानी

हे गणेश जी! जैसा बुढ़िया माई को दिया वैसा सबको देना।

Sarasvati Vandana in Naipali
सरस्वती वंदना नैपाली

सरस्वती वन्दना (सरस्वती वन्दना) ज्ञान र वाणीकी देवी माता सरस्वतीको ध्यान गर्दा प्रशंसा गर्नुपर्छ। या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।