English Mode BhagwanApp

पार्वती जी के लिए काशी आए थे शिव शंकर

kashi vishvanath Story
  • 358 View
  • 1 year ago
  • Mamta Sharma
  • 30 Dec 2024

भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगो में से 7वां ज्योतिर्लिंग काशी में विराजमान है। विश्वनाथ को सप्तम ज्योतिर्लिंग कहा गया है। मान्यता है कि काशी नगरी तीनों लोकों में सबसे न्यारी नगरी है। यहां पर शिवजी का त्रिशूल विराजित है। विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी के काशी में स्थित है।

इस तरह हुई विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शंकर ने पार्वती जी से विवाह किया और उसके बाद कैलाश पर्वत आकर रहने लगे। पार्वती जी विवाहित होने के बाद भी अपने पिता के घर रह रही थीं जो उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। उन्होंने एक दिन भगवान शिव से कहा कि आप मुझे अपने घर ले चलिए। आपसे विवाह होने के बाद भी मुझे अपने पिता के घर ही रहना पड़ता है। यहां रहना मुझे अच्छा नहीं लगता है। सभी लड़कियां शादी के बाद अपने पति के घर जाती हैं लेकिन मुझे अपने पिता के घर ही रहना पड़ रहा है। भगवान शिव ने माता पार्वती की बात को स्वीकारा और उन्हें अपने साथ अपनी पवित्र नगरी काशी ले आए। यहां आकर वो विश्वनाथ-ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से ही मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है। अगर कोई भक्त प्रतिदिन उनके दर्शन करता है तो उसके योगक्षेम का समस्त भार भगवान शंकर अपने ऊपर ले लेते हैं। ऐसा भक्त शिव शंकर के इस धाम का अधिकारी बन जाता है। साथ ही शिव की कृपा उस पर हमेशा बनी रहती है। मान्यता तो यह भी है कि भगवान विश्वनाथ स्वयं अपने परमभक्त को मरते समय तारक मंत्र सुनाते हैं।

Releated Stories

Bhimashankar Jyotirlinga
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की कथा शिव पुराण में वर्णित है। शिव और कुंभकर्ण के बेटे भीमा से भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का गहरा संबंध है, भीम से युद्ध करने की वजह से इस ज्योतिर्लिंग का नाम भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग पड़ा।

Rameshwaram Jyotirlinga Katha
रामेश्वर ज्योतिर्लिंग

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग ज्योतिर्लिंग का निर्माण स्वय मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने किया था। यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम नामक स्थान पर स्थित है। यह कथा शिव महापुराण में वर्णित है।

Lord Kartikeya birth Story
कार्तिकेय के जन्म की कथा

कार्तिकेय को मुरुगन नाम से भी पूजा जाता है, कार्तिकेय भगवान शिव और माँ पार्वती की प्रथम संतान हैं। इनकी पूजा मुख्यत: भारत के दक्षिणी राज्यों और विशेषकर तमिल नाडु में की जाती है।