श्री महाकाल ऐसा वरदान दो, गुणगान तुम्हारा सुनाता रहूं, संसार में जब जब जनम मिले, तो महाकाल नगरी में आता रहूं, श्री महाकाल ऐसा वरदान दों, गुणगान तुम्हारा सुनाता रहूं।
मैं भोला पर्वत का रै तू राणी महला की तेरी मेरी पार पड़ै ना बेशक लिखी पहला की. तू भोला पर्वत का रे मैं रानी महला की तेरी मेरी जोरी खूब जमे या लिखी पहला की किसे राजा तै ब्याह करवाले मेरी गैल म रै पछतावैगी तेरी काया पड़ज्या काली रै