Pitru Paksha Shradh - श्राद्ध कर्म

Shradh Karm Mahatva, vidhi information, Purnima Shradh has great importance in Hinduism, Pitru Paksha starts from this day itself. Bhadrapada Purnima is also known as Poornima Shraddha.

Pitru Paksha Shradh

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Wed, Feb 07, 2024
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पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए निमित्त तर्पण के साथ श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।

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हिंदू धर्म में पूर्णिमा श्राद्ध का बहुत महत्व है, पितृ पक्ष की शुरुआत इसी दिन से होती है। भाद्रपद पूर्णिमा को पूर्णिमा श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। तिथि के अनुसार हम अपने पूर्वजों के पिंडदान कर्म, तर्पण और श्राद्ध कर्म आदि करते हैं।

सावर पितृ अमावस्या

पितृ पक्ष की अमावस्या को सावर पितृ अमावस्या कहा जाता है, इस दिन उन सभी पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण किया जाता है जिनकी तिथि ज्ञात नहीं होती है। वो सभी पूर्वज जिनके बारे में किसी भी कारणवश उनको भूल गए वो सब इस दिन के तर्पण को स्वीकार करते हुए आशीर्वाद देते हुए सन्तुष्ट होते है।

पूर्णिमा श्राद्ध का महत्व

कहते हैं इस दिन सत्यनारायण की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में कभी भी धन आदि की कमी नहीं होती है. जो लोग घर में व्रत रखते हैं, उनके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है, सभी कष्ट दूर होते हैं। माना जाता है कि इस दिन उमा-महेश्वर का व्रत रखा जाता है, कहा जाता है कि यह व्रत भगवान सत्यनारायण ने भी किया था. इस दिन स्नान और दान आदि का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा के दिन से शुरू होता है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

पूर्णिमा श्राद्ध विधि

शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा श्राद्ध के दिन पितरों का श्राद्ध ऋषियों को समर्पित होता है। पूर्णिमा श्राद्ध के दिन गए पूर्वजों को उसी दिन तर्पण किया जाता है, उनके सामने चित्र रखा जाता है, चंदन की माला पहनाई जाती है और सफेद चंदन का तिलक लगाया जाता है। पूर्णिमा श्राद्ध के दिन पितरों को खीर खिलाएं, खीर बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसमें इलायची, केसर, चीनी, शहद मिलाकर पिएं। इसके बाद गोबर के उपले में आग जलाने के बाद पितरों के लिए तीन शव बनाए जाते हैं और एक यज्ञ किया जाता है, जिसके बाद पंचबली भोग लगाया जाता है। गाय, कौए, कुत्ते, चींटी और देवताओं के लिए प्रसाद निकालकर ब्राह्मण को खिलाएं। इसके बाद अपना भोजन स्वयं करें, ध्यान रहे कि श्राद्ध के दिन भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

पुरुष के श्राद्ध में ब्राह्मण पुरुष खाता है और स्त्री के श्राद्ध में ब्राह्मण स्त्री भोजन करती है। भोजन के बाद दक्षिणा दी जाती है। पितृ पक्ष में पितरों की मृत्यु की तिथि को श्राद्ध किया जाता है। गया में श्राद्ध करने का बहुत महत्व माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान देवताओं को जल अर्पित करने के बाद, उन्हें मृतकों के नामों का जाप करके जल भी चढ़ाना चाहिए।

Purnima Shradh is of great importance in Hinduism, Pitru Paksha begins from this day. Bhadrapada Purnima is also known as Poornima Shraddha. According to the date, we do Pind Daan Karma, Tarpan and Shradh Karma etc. of our ancestors. Amavasya of Pitru Paksha is called as Savar Pitru Amavasya, on this day Pind Daan and Tarpan are performed for all the ancestors whose date is not known or forgotten.

Significance of Purnima Shradh

It is said that by worshiping Satyanarayan on this day, a person never lacks money etc. in life. Those who keep fast in the house, happiness and prosperity reside in their house, all the troubles are removed. It is believed that the fast of Uma-Maheshwar is kept on this day, it is said that this fast was also done by Lord Satyanarayana. Bathing and charity etc. have special significance on this day. Pitru Paksha starts from the day of Bhadrapada Purnima, which increases its importance even more.

Purnima Shradh Method

According to the scriptures, on the day of Purnima Shradh, the Shradh of ancestors is dedicated to the sages. The ancestors who have gone on the day of Poornima Shradh are offered tarpan on the same day, a picture is placed in front of them, sandalwood garland is worn and white sandalwood tilak is applied. Feed kheer to ancestors on the day of Poornima Shradh, while making kheer, keep in mind that mix cardamom, saffron, sugar, honey and drink it. After this, after burning fire in the cow dung cake, three bodies are made for the ancestors and a Yagya is performed, after which Panchbali Bhog is offered. Take out prasad for cows, crows, dogs, ants and gods and feed them to Brahmins. After this, eat your own food, keep in mind that onion and garlic should not be used in the food on the day of Shradh.

In the Shradh of a man, a Brahmin man eats and in a woman's Shradh, a Brahmin woman eats food. Dakshina is given after the meal. Shradh is performed on the date of death of ancestors in Pitru Paksha. Performing Shradh in Gaya is considered to be of great importance. After offering water to the deities during Pitru Paksha, they should also offer water by chanting the names of the dead.

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