Bhagwan Mrityunjaya Stuti - भगवान मृत्युंजय स्तुति

Bhagwan Mritunjay bhagwan SHANKAR ko kaha jata hai, Bhagwan Mritunjay Stuti karne se bhakt ke rog aadhi-vyadhi mit jate hai.

Bhagwan Mrityunjaya Stuti

भगवान मृत्युंजय स्तुति

||ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥

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निराकार ज्ञान गम्य, न स्थूल, न सूक्ष्म। निर्विकार निर्मल, भक्तवत्सल मृत्युंजय। प्रकृति और पुरूष, जिन के शरीर से प्रकट हुए। चरणों से देव, दिखा, सूर्य-चन्द्रमा आप ही विद्या, परब्रह्म तुम ही हो। आपकी जय हो, मृत्युंजय की जय हो। मृत्युंजय महादेव की जयऽऽऽऽऽ हो॥

उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

आकाश, पृथ्वी, दिशा, जल, तेज तथा काल मृत्यंजय तुम ही हो, साकार - निराकार ॥ परमेश्वर, सद्ब्रह्मा, परब्रह्मा, महेश्वर । ऐसे गणाध्यक्ष, उमापति, त्रिनेत्र, विश्वेश्वर ॥ महामृत्युंजय रूद्र ईश्वर।

ॐ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥ ॐ अम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् 14 उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।

• अम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्यार्मुक्षीय मामृतात्

आपको ध्याऊ तो पाप हर जाए। छल कपट लोभ ईर्ष्या मोह मिट जाए || तू ही साकार- निराकार55555 तू है। जग का आधार तू ही तू है । तेरी वन्दना मैं किस मुहं करूँ तेरे दर्शन की चाह मैं करूं।। मृत्युंजय तेरी जय हो ऽऽऽऽऽ | महादेव की जय हो ऽऽऽऽऽ ॥

स्थिति उत्पत्ति लय सबके तुम कारण! सब कष्टों का तुम हो निवारण।। मृत्युंजय नाम का अमृत पिलाओ। लक्ष्यहीन जीवन, मार्ग दिखाओ ॥ नश्वर संसार से मुक्ति दिलाओ। सहजानन्द नाथ कहें, व्याधि से छुड़ाओ ।। मृत्युंजय तेरी जय हो ऽऽऽऽऽ महादेव की जय हो ऽऽऽऽऽ ॥

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