Ahoi Mata Vrat Katha - अहोई आठें व्रत कथा

Ahoi Ashtmi Katha ko ahoi Vart Katha bhi kahte hai, Ahoi Mata Vart Katha syahu mata katha

Ahoi Mata Vrat Katha

अहोई आठें व्रत कथा

Ahoi Vrat Date: Monday, 17 October 2022

अहोई आठें व्रत कथा (Ahoi Ashtami Katha)

एक समय एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसका भरापूरा परिवार था। उसके 7 बेटे, एक बेटी और 7 बहुएं थीं। दिपावाली से कुछ दिन पहले उसकी बेटी अपनी भाभियों संग घर की लिपाई के लिए जंगल से साफ मिट्टी लेने गई। जंगल में मिट्टी निकालते वक्त खुरपी से एक स्याहू का बच्चा मर गया। इस घटना से दुखी होकर स्याहू की माता ने साहूकार की बेटी को कभी भी मां न बनने का श्राप दे दिया। उस श्राप के प्रभाव से साहूकार की बेटी का कोख बंध गया।

श्राप से साहूकार की बेटी दुखी हो गई। उसने भाभियों से कहा कि उनमें से कोई भी ए​क भाभी अपनी कोख बांध ले। अपनी ननद की बात सुनकर सबसे छोटी भाभी तैयार हो गई। उस श्राप के दुष्प्रभाव से उसकी संतान केवल सात दिन ही जिंदा रहती थी। जब भी वह कोई बच्चे को जन्म देती, वह सात दिन में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता था। वह परेशान होकर एक पंडित से मिली और उपाय पूछा।

पंडित की सलाह पर उसने सुरही गाय की सेवा करनी शुरु की। उसकी सेवा से प्रसन्न गाय उसे एक दिन स्याहू की माता के पास ले जाती है। रास्ते में गरुड़ पक्षी के बच्चे को सांप मारने वाली होता है, लेकिन साहूकार की छोटी बहू सांप को मारकर गरुड़ पक्षी के बच्चे को जीवनदान देती है। तब तक उस गरुड़ पक्षी की मां आ जाती है। वह पूरी घटना सुनने के बाद उससे प्रभावित होती है और उसे स्याहू की माता के पास ले जाती है।

स्याहू की माता जब साहूकार की छोटी बहू की परोपकार और सेवाभाव की बातें सुनती है तो प्रसन्न होती है। फिर उसे सात संतान की माता होने का आशीर्वाद देती है। आशीर्वाद के प्रभाव से साहूकार की छोटी बहू को सात बेटे होते हैं, जिससे उसकी सात बहुएं होती हैं। उसका परिवार बड़ा और भरापूरा होता है। वह सुखी जीवन व्यतीत करती है।

अहोई माता की पूजा करने के बाद अहोई अष्टमी व्रत कथा अवश्य किसी बुजुर्ग महिला या घर के बड़ो से सुननी चाहिए।

Ahoi Mata Vart Story In English

Once upon a time there lived a moneylender in a town. He had a full family. He had 7 sons, a daughter, and 7 daughters-in-law. A few days before Diwali, her daughter went with her sisters-in-law to get clean soil from the forest for painting the house. While digging out the soil in the forest, a child of ink died from a scabbard. Saddened by this incident, Syahu's mother cursed the moneylender's daughter for never becoming a mother. Due to the effect of that curse, the moneylender's daughter's womb was tied(in control not to be Mother).

The moneylender's daughter was saddened by the curse. She told the sisters-in-law that any one of them should tie his womb. Hearing the words of her sister-in-law, the youngest sister-in-law got ready. Due to the ill effects of that curse, his child lived only for seven days. Whenever she gave birth to a child, she would die within seven days. She got upset and met a pandit and asked for a remedy.

On the advice of the pundit, she started serving the Surahi cow. Pleased with his service, the cow takes him to Syahu's mother one day. On the way, Garuda is about to kill the bird, but the moneylender's younger daughter-in-law kills the snake and gives life to the bird. By then the mother of that Garuda bird comes. She is impressed by him after hearing the whole incident and takes him to Syahu's mother.

When Syahu's mother hears about the philanthropy and service of the moneylender's younger daughter-in-law, she is pleased. Then blesses her to be the mother of seven children. With the effect of blessings, the moneylender's younger daughter-in-law has seven sons, from which she has seven daughters-in-law. His family is big and full. She leads a happy life.

After worshiping Ahoi Mata, Ahoi Ashtami fasting story must be heard from an elderly woman or elders of the house.

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