Kashi Vishwanath Jyotirlinga - काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

Bhagwan Shiv ji ka Ek Jyotirlingam hai Kashi Vishvnath katha, mantra and story
Kashi Vishwanath Jyotirlinga

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

|| ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के विषय में एक प्रचलित कहानी है। जो इस प्रकार है भगवान शिव जी अपनी पत्नी माता दुर्गा स्वरूपिणी पार्वती जी के साथ हिमालय पर्वत पर रहते थे। भगवान शिव जी की प्रतिष्ठा में कोई बाधा ना आये इसलिए पार्वती जी ने कहा कि कोई और स्थान चुनिए जहां हम अकेले और शांतिपूर्ण रह सकते हैं।

शिव जी को राजा दिवोदास की वाराणसी नगरी बहुत पसंद आयी। भगवान शिव जी के लिए शांत जगह के लिए निकुम्भ नामक शिवगण ने वाराणसी नगरी को निर्मनुष्य कर दिया। लेकिन इस सब से राजा को दुःख हुआ। राजा ने घोर तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और उनसे अपना दुःख दूर करने की प्रार्थना की।
दिवोदास ने बोला कि ब्रह्मदेव! देवता देवलोक में रहे, पृथ्वी तो मनुष्यों के लिए है। कृपा करके मेरी पिड्डा को दूर करे, ब्रह्मा जी के कहने पर शिव जी मंदराचल पर्वत पर चले गए। वे चले तो गए लेकिन काशी नगरी के लिए अपना मोह नहीं त्याग सके। तब भगवान विष्णु जी ने राजा को तपोवन में जाने का आदेश दिया। उसके बाद वाराणसी महादेव जी का स्थायी निवास हो गया और शिव जी ने अपने त्रिशूल पर वाराणसी नगरी की स्थापना की।

एक ये भी मान्यता है कि भगवान शिव जी अपने भक्त के सपने में आये और कहा कि तुम गंगा में स्नान करोगे उसके बाद तुम्हे दो शिवलिंगों के दर्शन होंगे। उन दोनों शिवलिंगों को तुम्हे जोड़कर स्थापित करना होगा। तब दिव्य शिवलिंग की स्थापना होगी। तब से ही भगवान शिव माँ पार्वती जी के साथ यहाँ विराजमान हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री काशी विश्वनाथ दो भागों में है। दाहिने भाग में शक्ति के रूप में माँ पार्वती विराजमान हैं, दूसरी ओर भगवान् शिव वाम रूप में विराजमान है। काशी अनंतकाल से बाबा विश्वनाथ के जयकारों से गूँज रही है। शिवभक्त यहां मोक्ष की कामना से आते हैं। यह भी माना गया है कि काशी नगरी शिवजी के त्रिशूल पर टिकी हुई है व जिस जगह ज्योतिर्लिंग स्थापित है, वह जगह कभी भी लोप नहीं होती। स्कन्द पुराण के अनुसार जो प्रलय में भी लय को प्राप्त नहीं होती, आकाश मंडल से देखने में ध्वज के आकार का प्रकाश पुंज दिखती है, वह काशी अविनाशी है।

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