गुप्त नवरात्रि

गुप्त नवरात्रि

श्रीं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै नमः स्वाहा

शास्त्रों के मुताबिक, एक वर्ष में 2 नहीं बल्कि 4 बार नवरात्रि आती है। इनमें 2 चैत्र और शारदीय नवरात्रि और बाकी के दो गुप्त नवरात्रि। गुप्त नवरात्रियों में से एक माघ और दूसरी आषाढ़ के महीने में आती है। मान्यता है कि इन्हें गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके कई रहस्य बरकरार हैं। यह भी कहा जाता है कि इस दौरान दुर्गा मां की पूजा जितनी गुप्त तरीके से की जाए उतना ही फल अधिक मिलता है। इन दिनों मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। गुप्त नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र को सिद्ध करने वाली माना जाता है। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक महाविद्याओं को भी सिद्ध करने के लिए मां दुर्गा की उपासना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में मां कालिके, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता चित्रमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूम्रवती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है। मां दुर्गा की गुप्त नवरात्रि में ऐसे करें पूजा- 1. गुप्त नवरात्रि के दौरान आधी रात को मां दुर्गा की पूजा की जाती हैं। 2. मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित कर लाल रंग का सिंदूर और चुनरी अर्पित करें। 3. इसके बाद मां दुर्गा के चरणों में पूजा सामग्री को अर्पित करें। 4. मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है। 5. सरसों के तेल से दीपक जलाकर 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। दुर्गा सप्तशती का ऐसे करें पाठ- 1. दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सबसे पहले स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। 3. बैठने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग करना चाहिए, अगर आपके पास कुशा का आसन नहीं है तो ऊन के बने हुए आसन का प्रयोग कर सकते हैं। 4. पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी एवं सभी देवगणों को प्रणाम करें। माथे पर चंदन या रोली का तिलक लगाएं। 5. लाल पुष्प, अक्षत एवं मां को जल अर्पित करते हुए पाठ का संकल्प लें। 6. इसके बाद पाठ को आरंभ करने से पहले श्रीं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै नमः स्वाहा मंत्र का जाप करें। इस मंत्र को आरंभ और अंत में 21 बार जप करना चाहिए। 7. इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए पाठ का आरंभ करें। इस तरह से मां दुर्गा सप्तशती का पाठ करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।